छत्तीसगढ़

कोरबा मेडिकल कॉलेज में नवजात की मौत, पति ने लगाया डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप

Shantanu Roy
17 Oct 2025 11:47 PM IST
कोरबा मेडिकल कॉलेज में नवजात की मौत, पति ने लगाया डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप
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Korba. कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में शुक्रवार को एक नवजात शिशु की मौत के बाद हंगामा मच गया। मृतक बच्चे के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि प्रसव के दौरान डॉक्टरों ने जबरदस्ती बच्चेदानी खोलने की कोशिश की, जिससे बच्चे की जान चली गई। वहीं अस्पताल प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है और कहा कि मौत प्रसव के दौरान उत्पन्न जटिलता के कारण हुई। मामला कोरबा जिला
अस्पताल
पुलिस चौकी क्षेत्र का है। अयोध्यापुरी निवासी आशीष विश्वकर्मा ने शुक्रवार को अपनी पत्नी किरण विश्वकर्मा को मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया था। किरण की प्रसव तिथि बीत जाने के बाद परिजनों ने सुरक्षित डिलीवरी के लिए अस्पताल में दाखिल करवाया था। डिलीवरी प्रक्रिया के दौरान नवजात की मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजन भड़क उठे और अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया।

पति ने लगाया गंभीर आरोप
मृतक नवजात के पिता आशीष विश्वकर्मा ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों ने उनकी पत्नी के साथ गलत तरीके से प्रसव करवाने की कोशिश की। उनका कहना है कि डॉक्टरों ने बच्चेदानी (यूट्रस) न खुलने पर जबरदस्ती हाथ डालकर उसे खोलने की कोशिश की, जिससे मां और बच्चे दोनों को खतरा हुआ। आशीष ने बताया कि इस प्रक्रिया में अत्यधिक दर्द और रक्तस्राव हुआ, और इसी दौरान नवजात की मौत हो गई। आशीष के अनुसार, उनकी पत्नी किरण के पहले दो प्रसव सामान्य रूप से हुए थे। उनके दो बच्चे हैं जिनकी उम्र क्रमशः 12 और 10 वर्ष है। तीसरा बच्चा भी सामान्य रूप से जन्म लेने वाला था, लेकिन अस्पताल की लापरवाही से उसका जन्म मृत हो गया। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की जल्दबाजी और गलत प्रक्रिया की वजह से यह घटना घटी है।

डॉक्टरों ने आरोपों को बताया निराधार
वहीं, जिला मेडिकल अस्पताल के डॉक्टर आदित्य सिसोदिया ने परिजनों के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि प्रसव प्रक्रिया के दौरान चिकित्सकीय टीम ने पूरी सावधानी से काम किया था। डॉक्टर सिसोदिया के अनुसार, किरण विश्वकर्मा के पहले दो प्रसव सामान्य हुए थे, इसलिए तीसरे प्रसव को लेकर किसी जटिलता की संभावना नहीं थी। उन्होंने बताया कि डिलीवरी के दौरान प्रसूता की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने से प्रसव प्रक्रिया जटिल हो गई थी। ऐसे में डॉक्टरों को स्थिति को संभालने में
कठिनाई
हुई। डॉक्टर सिसोदिया ने बताया कि बच्चेदानी में जटिलता उत्पन्न हो गई थी और जब तक सर्जरी की तैयारी होती, बच्चा डिलीवर हो चुका था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नवजात की मौत ऑक्सीजन की कमी (Asphyxia) के कारण हुई है। मेडिकल रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि बच्चा गर्भ के भीतर ही दम घुटने से मर गया था। डॉक्टर सिसोदिया ने कहा कि यह एक चिकित्सकीय जटिलता थी, न कि किसी डॉक्टर या स्टाफ की लापरवाही।

प्रबंधन ने कराया पोस्टमार्टम, पुलिस जांच में जुटी
घटना की सूचना मिलते ही जिला अस्पताल प्रबंधन ने तत्काल बच्चे के शव का पोस्टमार्टम कराने का निर्णय लिया। अस्पताल प्रशासन ने पूरी घटना की रिपोर्ट तैयार कर पुलिस को सौंपी है। वहीं, जिला अस्पताल पुलिस चौकी ने परिजनों की शिकायत दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि प्रसव के दौरान किसी तरह की तकनीकी त्रुटि का सबूत नहीं मिला है। पुलिस फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
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